मोबाइल की खोज लक्जरी किसने बनाया

मोबाइल की खोज लक्जरी किसने बनाया

जिसकी सहायता से हम अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के नजदीक ना जाकर भी उनसे बातचीत कर सकते हैं।मोबाइल की खोज लक्जरी किसने बनाया ,हमारा mobile phone लेकिन क्या आपको पता है mobile ki khoj-mobile phone kisne banaya मोबाइल फोन का आविष्कार कब और कहाँ हुआ और इसके अविष्कारक कौन थे जाने-विश्व के पहले mobile phone को किसने बनाया था और कब? मोबाइल का आविष्कार किसने किया, mobile phone kab or kisne banaya, mobile phone ki khoj kisne or kab ki, mobile phone ke bare me rochak jankari hindi me अगर आपको भी यह नहीं पता तो इस post को देखने के बाद आप यह जान पाएंगे कि पहला मोबाइल फोन कब और कहाँ बनाया गया था और इसे बनाने वाले व्यक्ति कौन थे। लक्जरी मोबाइल फोन कहा बना कैसे। 
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क्या आपको किसी अज्ञात टेलीफोन नंबर से कॉल आया है और आपके दिमाग में सबसे पहला फोन आता है कि यह फोन नंबर किसका है? कई बार आपको ऐसी कॉल आती है जो आपको परेशान करती है और आप यह पता लगाना चाहते हैं कि फोन नंबर किसका है। ऐसे समय होते हैं जब कॉल के दूसरे छोर पर मौजूद व्यक्ति केवल एक बेवकूफ होता है, जिसका एकमात्र इरादा आपको परेशान करना होता है जो आपके फोन नंबर का प्रश्न आपके दिमाग में लाता है। 

हम अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ ज़्यादा समय नहीं बिता पाते इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि कभी हमें ऑफिस से छुट्टी नहीं मिलती तो कभी थकान की वजह से हम कहीं नहीं जाना चाहते सदी में विज्ञान ने ऐसा अनोखा उपकरण दिया है। 


दोस्तों, पूरा विश्व आज एक परिवार का रूप ग्रहण कर चुका है और हालत यहाँ तक पहुंच गयी है कि कोई भी व्यक्ति विश्व के किसी भी हिस्से में स्थित दूसरे आदमी से पलभर में संपर्क कर सकता है। यह सब मुमकिन हुआ है मात्र एक उपकरण के आविष्कार के कारण और वह है 'मोबाइल फोन'। कृषि क्रांति, औद्योगिक क्रांति से सूचना क्रांति के इस उपकरण ने मानव जीवन पर गहरा असर डाला है। लेकिन क्या आपको मालूम है पूरे विश्व को समीप ला देने वाले इस Mobile phone ka aviskar kisne kiya? तो हम बता दे कि सर्वप्रथम इसको 3 अप्रैल 1973 को अमेरिकी इंजीनियर मार्टिन कूपर (Martin Cooper) ने बनाया था

मोबाइल का मतलब है कि आप अपना कार्य जहाँ चाहे ले जा सकते हैं, चाहे आप घर में हों, हवाई जहाज में बैठे हों, होटल में हों, चाहें कहीं दूर, आप इसके फायदे वहाँ बैठ कर उठा सकते हैं, चाहे आपको बात करनी हो या अपने मोबाइल को कंप्यूटर से जोड़कर कोई नई फाइल या फोल्डर खोलना हो या फिर कुछ आंकड़ों का आदान-प्रदान करना हो या ई-मेल भेजना हो या देखना हो, मोबाइल के जरिये आप दुनिया भर की सूचनाएँ अपने साथ ले जा सकते हैं, देख सकते हैं व उनका प्रयोग जहाँ चाहे वहाँ कर सकते हैं।


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जबकि वायरलेस का मतलब है कि आपके यंत्र (Computer, Keyboard, Mouse, Printer आदि) किसी विशेष प्रणाली से बिना तार के जुड़े रहते हैं जैसे कि वायरलेस लेन, जी.पी.आर.एस., ब्लूटूथ तकनीक, वाई.फाई. आदि। ये आधुनिक यंत्रों को बिना तार के तार से जोड़ने का कार्य करते है। आप इनके जरिये अपना ई-मेल देख व भेज सकते हैं, मनचाहे दस्तावेज दूर बैठकर छाप सकते हैं, जबकि दो यंत्रों के बीच कोई तार या किसी प्रकार का वास्तिवक सम्बन्ध नहीं होता है।

मोबाइल फोन का निर्माण मार्टिन कूपर नामक अमेरिकी इंजीनियर ने किया था जिसे उन्होंने 3 अप्रैल 1973 को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया था मोबाइल कंपनी मोटोरोला के साथके साथ मिलकर इस मोबाइल फोन का निर्माण किया था। जिसके लिए उन्हें साल 2013 में मारकोनी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था भारत में पहली गैर व्यवसायिक मोबाइल फोन वन सेवा की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को दिल्ली में हुई थी। 

मोबाइल फोन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य आज भले ही हम हल्के और स्लिम मोबाइल के इस्तेमाल करते हैं लेकिन जिस मोबाइल से पहले कॉल की गई थी उसका वजन 1.1 किलोग्राम मोटाई 13 सेंटीमीटर और चौड़ाई 4.45 सेंटीमीटर थी मोबाइल फोन को चार्ज होने में 15 से 20 मिनट का समय लगता है और इसकी क्षमता 1 से 2 दिन की होती है पहले मोबाइल फोन को पूरी तरह से चार्ज होने में 10 घंटे का समय लगता था। जिसके बावजूद यह सिर्फ़ 20 मिनट तक ही चल पाता था पहले मोबाइल फोन की बैटरी का वजन आज की तुलना में 4 से 5 गुना ज़्यादा था साल 1983 में मोटोरोला ने जिस पहले मोबाइल हैंडसेट को बाज़ार में उतारा था उसकी कीमत लगभग 200000 थी। 

टेक्नोलॉजी की शुरुआत फिनलैंड में हुई तुझे टेक्नोलॉजी की शुरुआत के पूरे 10 साल बाद साल 2001 में 3G टेक्नोलॉजी लाया गया जिसे जापान की कंपनी एनटीटी डोकोमो ने शुरू किया था मोबाइल फोन के आविष्कार एवं उपयोग से जुड़ी कुछ रोचक बातें दुनिया के मोबाइल फोन का निर्माण किया था जिसे उन्होंने 3 अप्रैल को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया था प्रदर्शित किया था। मार्टिन कूपर द्वारा बनाये गए पहले मोबाइल फोन का वजन लगभग 2 Kg था! एक बार चार्ज होने के बाद उस मोबाइल से 30 मिनट तक बाते कि जा सकती थी लेकिन उसे दोबारा चार्ज करने में 10 घंटे का समय लगता था! उस समय उसकी कीमत लगभग 2700 अमेरिकी डॉलर (2 लाख रूपए) थी।

आज हर किसी के पास मोबाइल फ़ोन, मोबाइल फ़ोन आज की ज़रूरत बन गया हम मोबाइल के बिना घर से निकलने की भी नहीं सोचते, तो आज जानिए की मोबाइल Phone किसी ने और कब बनाया था।आज हम आपको बतायेगे फ़ोन की पूरी कहानी और इसके कुछ रोचक तथ्य जो सायद आप नहीं जानते ।
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सबसे पहला मोबाइल फ़ोन बना  Motorola का 1973 में John F. Mitchell और Martin Cooper ने दिखाया था जिसका वजन 2 किलो था । Motorola का DynaTAC 8000x Model व्यावसायिक रूप से 1983 में उपयोग किया गया था 1979 में पहला Automated Cellular Network जापान में शुरू किया था ये First-Generation (1G) System था जिसकी मदद से एक बार में कई लोगो आपस में कॉल कर सकते थे। 


1973 में उसे 0G (Zero Generation) मोबाइल फोन कहा जाता था।
पहले मोबाइल फोन के आविष्कार के 10 साल बाद वर्ष 1983 में मोटोरोला ने आम लोगों के लिए पहली बार मोबाइल बाज़ार में लाया जिसका नाम था–Motorola DynaTAC 8000X । एक बार चार्ज होने के बाद इससे 30 मिनट तक बाते हो सकती थी। इसमें 30 मोबाइल नंबर भी save किया जा सकता था और उस समय उसका मूल्य 3995 अमेरिकी डॉलर (₹ 295669) रखा गया था।


  • पहला सिम कार्ड 

सबसे पहला सिम कार्ड सन  1991 में Munich Smart Card Maker Giesecke & Devrient ने  Finnish  Wireless Network Operator के लिए बनाया था। 1991 में 2G टेक्नोलॉजी Finland में Radiolinja ने शुरू की और उसके पूरे 10 साल बाद 2001 में आया 3G जो जापान की कंपनी NTT DoCoMo ने शुरू किया था 1983 से 2014 तक लगभग 700 करोड़ Mobile Phone का उपयोग किया गया 2014 की सबसे ज़्यादा फ़ोन बनाने वाली कंपनी Samsung, Nokia, Apple और LG थी 2014 में दुनिआ के 25% मोबाइल अकेला सैमसंग फ़ोन ने बनाये थे 13% Mobile Nokia ने बनाये थे। 

मोबाइल और वायरलेस ये दोनों शब्द एक प्रकार से समान दिखते हुए भी समान नहीं हैं। मुख्य अन्तर इन दोनों के कार्य करने की प्रणाली, व दोनों के अलग-अलग फायदे का है। मोबाइल की विशेषता यह है कि वह घर, दफ्तर, शहर या शहर के बाहर कहीं भी दूर सुनसान जगह आदि में भी कार्य कर सकता है। जहाँ चाहे वहाँ कार्य करने की प्रणाली उपलब्ध है। किसी भी जगह से हम मोबाइल का उपयोग कर सकते हैं, जबकि वायरलेस / वायरलेस लैन (Local Network) का मतलब है कि दो भिन्न प्रकार के यंत्रों आदि को बिना तार के जोड़ना व उसी प्रकार सामान्य रूप से कार्य करना जैसे कि तारों को जोड़ कर किया जाता हैं।


  • लक्जरी मोबाइल फोन

कई मोबाइल फोन हैं जो हीरे से जड़ी हैं। हालाँकि क्या आप जानते हैं कि ये फोन कैसे बनाए जा रहे हैं? आपको यह जानकर आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि इनमें से कुछ मोबाइल फोन हाथों द्वारा बनाए जा रहे हैं। यह निश्चित रूप से काफी महत्त्वपूर्ण बिंदु है। क्या आप जानते हैं कि स्विटज़रलैंड में एक पूरा उद्योग है जहाँ ये लक्ज़री फोन बनाए जा रहे हैं और वह भी हाथों की मदद से। 

आपको यह तथ्य जानकर आश्चर्य हो सकता है लेकिन यह निश्चित रूप से सच्चाई है। गोल्डविश भ्रम के बारे में बात कर रहा हूँ। यह मोबाइल फोन स्विट्जरलैंड में कई ज्वैलर्स द्वारा बनाया गया है। मूल हैंडसेट और भी तैयार किया जाता है, जहाँ हीरे के साथ-साथ सोने की स्टडिंग की जाती है। यह मोबाइल फोन सिर्फ़ एक उदाहरण है। वास्तव में यदि आप सभी लक्जरी फोन पर एक नज़र रखेंगे तो आपको पता चलेगा कि उनमें से 90% हाथ से बने हैं।

इन लक्जरी मोबाइल फोन का अध्ययन करना एक कला है और आपको निश्चित रूप से उनके क्षेत्र में कई विशेषज्ञ नहीं मिलेंगे। कुछ बहुत पुराने परिवार इस काम में शामिल हो रहे हैं। ऐसा ही एक बाज़ार सूरत में है जो गुजरात (भारत) के शहरों में से एक है। इस शहर में हीरे के अधिकांश काम किए जा रहे हैं और फिर दुनिया भर में उत्पादों का वितरण किया जा रहा है। यहाँ से आपको बहुत सारे पारंपरिक परिवार मिलेंगे जो इस नौकरी में लगे हुए हैं।

इसलिए एक बात बिल्कुल स्पष्ट है कि उदाहरण के लिए इन लक्ज़री फोनों में गोल्डविश भ्रम को हाथ की मदद से सजाया जा रहा है। हालाँकि कुछ नवीनतम तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है और यह हस्तनिर्मित नहीं है। जापान, ताइवान और कोरिया जैसे देश कुछ ऐसे देश हैं जहाँ इन मोबाइल फोन से सम्बंधित चिप्स विकसित किए जा रहे हैं। वे ऐसा करने वाले पहले व्यक्ति थे, लेकिन अब फ्रांस, इंग्लैंड जैसे देशों के साथ-साथ अमेरिका भी चिप्स विकसित करने में काफी शामिल हैं।

गोल्डविश भ्रम कोई अपवाद नहीं है। आपको निश्चित रूप से पता चल जाएगा कि इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक काफी भयानक है। हालाँकि मैं इस लेख में तकनीक के बारे में बात नहीं करने जा रहा हूँ। यहाँ मैं सजावट के बारे में बात कर रहा हूँ और यह हाथों द्वारा किया जाता है। स्विट्जरलैंड जैसे देशों के साथ-साथ सूरत जैसे शहर भी इस नौकरी के लिए काफी जाने जाते हैं।


  • India में मोबाइल फोन कब आया?

भारत में मोबाइल फोन का आगमन दुनिया के पहले मोबाइल (DynaTAC 8000X) बनने के 12 साल बाद 31 जुलाई, 1995 को हुआ। मतलब आज से 23 वर्ष पहले। दूरसंचार सेवाओं के विस्तार के लिए भारत में 20 फरवरी, 1997 में ट्राई (Telecom Regulatory Authority of India) की स्थापना की गयी।


भारत में मोबाइल सेवा प्रारम्भ करने का प्रयास वर्ष 1994 के मध्य से ही भारत के उद्यमी भूपेन्द्र कुमार मोदी द्वारा किया जाने लगा था। उन्हीं की कंपनी 'Modi Telstra' ने देश में पहली बार मोबाइल सेवा का प्रारम्भ किया तथा पहला मोबाइल काॅल इसी कंपनी के नेटवर्क (जिसे मोबाइल नेट कहा जाता था) पर कोलकता से दिल्ली किया गया था। इसी कंपनी को आगे चलकर 'Spice Mobiles' के नाम से जाना गया।

वर्तमान में भारत तथा विश्व में कितने मोबाइल फोन यूजर्स है
पिछले वर्ष (2018) के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में भारत में लगभग 1 अरब 5 करोड़ मोबाइल फोन यूजर्स हैं, जिसमें से लगभग 38 करोड़ 69 लाख 34 हजार स्मार्टफोन यूजर्स हैं। वर्ष 2014 के बाद भारत में मोबाइल प्रयोग करने वाले लोगों की संख्या काफी तेजी से बढ़ी है। इस वर्ष (2018) तक भारत विश्व का दूसरा सबसे ज़्यादा मोबाइल प्रयोग करने वाला तथा उत्पादन करने वाला देश बन गया है। वर्ष 2014 में 30 लाख मोबाइल फोन भारत में बनाये गए, जो वर्ष 2017 में बढ़कर 1.1 करोड़ तक पहुंच गया। वर्तमान में चीन मोबाइल प्रयोग तथा उत्पादन करने वाला दुनिया का सबसे बड़ा देश है।


  • Mobile का इतिहास एक नजर में

चालीस साल पहले तीन अप्रैल 1973 को मोटोरोला के इंजीनियर मार्टिन कूपर ने अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनी के एक कर्मचारी को फ़ोन कर मोबाइल फ़ोन पर बातचीत की शुरुआत की थी। इसके क़रीब 10 साल बाद मोटोरोला ने पहला मोबाइल हैंडसेट बाज़ार में उतारा था। इसकी क़ीमत थी क़रीब दो लाख रुपये  आज दुनिया में इसके क़रीब साढ़े छह अरब उपभोक्ता हैं। मोटोरोला के पहले हैंडसेट का नाम था, डायना टीएसी. इसकी बैट्री को एक बार रिचार्ज कर क़रीब 35 मिनट तक बातचीत की जा सकती थी। डायना टीएसी को बाज़ार में उतारने से पहले उसका वजन क़रीब 794 ग्राम तक कम किया गया। इसके बाद भी यह इतना भारी था कि इसकी चोट से किसी की जान जा सकती थी।

मोबाइल फ़ोन निर्माताओं ने उपभोक्ताओं की ज़रूरतों को देखते हुए अब हैंडसेट में मेमोरी कार्ड के लिए जगह, फ्लिप स्क्रीन, कैमरा, टच स्क्रीन और यूएसबी पोर्ट जैसी सुविधाएँ देनी शुरू कर दी हैं। भारत, अफ्रीका और ब्राजील जैसी उभरती अर्थव्यस्थाएँ मोबाइल फ़ोन का प्रमुख बाज़ार हैं। भारत में हर महीने क़रीब 60 लाख मोबाइल हैंडसेट बिकते हैं।


आज मोबाइल फोन पर बातचीत के लिए प्रतिदिन के रिचार्ज कूपन से लेकर मासिक बिलिंग वाले प्लान मौजूद हैं। इनके जरिए उपभोक्ता मोबाइल पर बातचीत, इंटरनेट सर्फिंग, मैसेजिंग जैसी सुविधाओं का लाभ उठाते हैं।सोनी का नया स्मार्टफ़ोन एक्सपीरिया ज़ेड पानी में भी ख़राब नहीं होता। यही नहीं यह कंपनी के कैमरों की ही तरह एचडीआर विडियो भी रिकॉर्ड कर सकता है।

ओ2 के नाम से मशहूर सेलनेट ने 1985 में अपनी सेवा शुरू करके वोडाफोन का एकाधिकार तो़ड़ दिया। वोडाफ़ोन को दस लाख ग्राहक बनाने में नौ साल का समय लगा। वहीं सेलनेट ने केवल डेढ़ साल में ही अगले दस लाख ग्राहक जोड़ लिए.हास्य कलाकार एरिन वाइज ने 1985 में सेंट कैथरीन बंदरगाह से वोडाफ़ोन के दफ्तर फोन कर ब्रिटेन में मोबाइल फ़ोन के इस्तेमाल की शुरुआत की। 

फ्रांसीसी व्यवसायी फ़िलिप ख़ान ने 11 जून 1997 को अपनी नवजात बेटी सोफ़ी की फोटो लेकर कैमरे वाले मोबाइल फ़ोन की शुरुआत की। भारत सहित कई दूसरे देशों ने पिछले कुछ सालों में गाड़ी चलाते समय मोबाइल फ़ोन पर बात करने पर प्रतिबंधित लगा दिया है।साल 1993 में आयोजित वायरलेस वर्ल्ड कांफ्रेंस में आईबीएम सिमान नाम का पहला स्मार्टफ़ोन पेश किया गया। इसमें शुरुआती दौर की टचस्क्रीन लगी हुई थी। यह ईमेल, इलेक्ट्रिक पेजर, कैलेंडर, कैलकुलेटर और ऐड्रेस बुक के रूप में काम करता था।

ब्रिटेन में पहला एसएमएस नील पापवर्थ नाम के एक इंजीनियर ने तीन दिसम्बर 1992 को ऑरबिटल 901 हैंडसेट ने अपने मित्र रिचर्ड जॉर्विस को भेजा था। उन्होंने लिखा था, ' मैरी क्रिसमस।एरिजोना के एक प्रतिष्ठान ने सितंबर 2007 में कुत्तों के लिए मोबाइल फ़ोन बाज़ार में उतारा। क़रीब 25 हज़ार रुपये की क़ीमत वाला यह फ़ोन जीपीएस सैटेलाइट सुविधा से लैस था। टैक्स मैसेज के लिए 160 अक्षरों की सीमा फ्रीडेलहम हेलीब्रांड नाम के एक जर्मन इजीनियर ने शुरू की। इसका ख्याल उन्हें अपने टाइपराइटर पर काम करते हुए आया। साल 2012 में एक अरब 70 करोड़ मोबाइल हैंडसेट बिके. सबसे अधिक बिकने वालों में सैमसंग, नोकिया और ऐप्पल के हैंडसेट शामिल थे।



  • दुनिया का सबसे महंगा फोन

दुनिया का सबसे महंगा फोन स्‍टॉट ह्यूज डायमंड रोज आइफोन 4 है जिसकी कीमत 7, 850, 000 डॉलर है। इस फोन में 100 कैरेट के 500 डायमंड लगे हुए हैं। फोन का बैक कवर में रोज गोल्‍ड का बना हुआ है जबकि एप्‍पल को लोगों 53 डायमंड का बना हुआ है। नोकिया का 1100 फोन दुनिया में सबसे ज्‍यादा बिकने वाला फोन है, पूरी दुनिया में इसके करीब 250 मीलियन यूनिट बिकी थीं। नोकिया ने एस 1100 फोन को 2003 में लांच किया था। सोनिम एक्‍सपी 3300 (XP3300) फोर्स दुनिया का सबसे मजबूत स्‍मार्टफोन है जिसका नाम गिनीज वर्ल्‍ड रिकार्ड में भी दर्ज है। 

इस फोन को 84 फीट की ऊंचाई से फेकने के बाद भी प्रयोग किया गया है। इसके अलावा पानी के अंदर 2 मीटर तक फोन को रखने पर भी इसमें कोई खराबी नहीं आई.सीमेंस ने एसएल 45 (SL45) नाम से दुनिया का पहला म्‍यूजिक फोन लांच किया था। जिसमें एक्‍पेंडेबल मैमोरी के साथ एमपी 3 प्‍लेयर और हेडफोन सपोर्ट भी था।

ब्रिटेन में 2011 में मोबाइल फोन उपभोक्ताओं ने डेढ़ सौ अरब एसएमएस भेजे थे। एसएमएस भेजने वालों में 12 से 15 साल के बच्चों की संख्या अधिक थी। इन्होंने हर हफ्ते औसतन 193 एसएमएस भेजे.दुनिया भर में कहीं भी किसी भी समय लोग एक दूसरे से संपर्क करने के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं।

एक समय था जब इसके लिए लोग बहुत वजनी हैंडसेट का इस्तेमाल करते थे। आज ये मोबाइल हैंडसेट बहुत ही पतले, छोटे और सुविधाजनक हो चुके हैं।आधुनिक मोबाइल फ़ोन इंफ्रारेड, ब्लूटूथ और अन्य वायरलेस सुविधाओं से लैस हैं। मोबाइल फ़ोन की तमाम खूबियों के बाद भी इनकी कुछ कमजोरियाँ भी हैं, जैसे गाड़ी चलाते समय इसका इस्तेमाल ख़तरनाक है, कई बार इसका इस्तेमाल परेशान करने में भी किया जाता है। वहीं कुछ छात्र इसका इस्तेमाल नकल करने में करते हैं। इसे देखते हुए कई स्कूलों ने कक्षाओं में मोबाइल फ़ोन ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। आजकल के मोबाइल फ़ोन पर नेट बैंकिंग, वेब सर्फिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और वीडियो गेम जैसी सुविधाओं का आनंद लिया जा सकता है।

शोध में पता चला है कि स्मार्टफ़ोन का उपयोग करने वाले लोग प्रतिदिन औसतन 12 मिनट फ़ोन कॉल्स पर खर्च करते हैं। मोबाइल फ़ोन के उपभोक्ता हैंडसेट पर गेम खेलने पर 14 मिनट खर्च करते हैं। मोबाइल फ़ोन के उपभोक्ता हैंडसेट पर औसतन 16 मिनट म्यूज़िक सुनते हैं। वे सोशल मीडिया पर 17 मिनट बिताते हैं। ऑनलाइन ब्राउजिंग पर 25 मिनट गुजारते हैं। मोबाइल फ़ोन उपभोक्ता हैंडसेट का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल समय देखने के लिए करते हैं। 

अब तक सबसे ज़्यादा बिकने वाले हैंडसेट का रिकॉर्ड नोकिया 1100 के नाम है, जिसके 2003 में लांच होने के बाद 25 करोड़ से अधिक सेट बिके थे। जब यह अफ़वाह उड़ी कि नोकिया 1100 का इस्तेमाल ऑनलाइन मनी ट्रांसफर को हैक करने में हो सकता है तो इस फोन की कीमत लगभग $10000 के करीब हो गई थी आईफ़ोन को जून 2007 में अमरीका में लांच किया गया था।उस समय लोग फोन लेने के लिए रातों को लाइन में लगते थे हालांकि, बाद में इससे उन्हें निराशा हाथ लगी क्योंकि यह फ़ोन उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा।

साल 2011 के अंत तक विकासशील देशों में लगभग 78% लोगों के पास फोन था। विकसित देशों में यह आंकड़ा प्रति सौ लोगों पर 122 का था। 2011 के अंत तक भारत में प्रति सौ लोगों में से 74 लोग मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे थे। ऐसा अनुमान है कि 2016 में मोबाइल फ़ोन की सालाना बिक्री क़रीब दो अरब एक करोड़ यूनिट हो जाएगी।  भारत में 2015 तक मोबाइल फ़ोन की सालाना बिक्री 32.2 करोड़ यूनिट होने का अनुमान है। 

ब्रिटेन और वेल्स में 2008 के बाद से हर साल क़रीब आठ हजार लोगों को गाड़ी चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल करने के आरोप में पकड़कर अदालत में पेश किया जाता है। इनमें से क़रीब एक चौथाई मामले अकले लंदन में सामने आते हैं। गूगल की सहायक कंपनी एंड्रायड इंक ने 2007 में टच स्क्रीन मोबाइल फ़ोन, स्मार्टफ़ोन और टैबलेट कंप्यूटर के लिए एंड्रायड नाम का ऑपरेटिंग सिस्टम बाज़ार में पेश किया।

मोबाइल से मैसेज करने के मामले में पूरी दुनिया में फिलीपीन सबसे आगे हैं यहाँ पर रोज 1.4 बिलियन टेक्‍ट मैसेज भेजे जाते हैं पहले यहाँ पर मोबाइल से मैसेज करने पर कोई चार्ज नहीं लगता था लेकिन अब इसके लिए नाम मात्र का चार्ज देना पड़ता है। 1985 में 45 साल के रीसर्चर फ्रॉयडल्‍म हिलब्रांड ने 160 कैरेक्‍टर मैसेज का कांसेप्‍ट निकाला था। उन्‍होंने देखों कि टाइपराइटर में ज्‍यादातर मैसेज 160 कैरेक्‍टर के थे। जबकि सबसे पहले मोबाइल में मैसेज करेक्‍टर लिमिट 128 कैरेक्‍टर थी। हो सकता है। 

आपको ये सुनकर थोड़ी हैरानी हो लेकिन 1865 में नोकिया कागज बनाने का काम करती थी। इसके अलावा कंपनी रबर के कुछ प्रोडेक्‍ट भी बनाती थी जैसे इलेक्‍ट्रिक केबल, गैस मास्‍ट और प्‍लास्‍टिक, नोकिया ने अपना सबसे पहला मोबाइल 1980 में लांच किया था। जेम्‍स बांड ने अपनी मूवी में सबसे पहला फोन सोनी एरिक्‍सन JB988 प्रयोग किया था। जेम्‍स बांड अपने इस फोन से न केवल कॉल कर सकता था बल्‍कि इसमें कई एक्‍ट्रा फीचर भी थे। जैसे फिंगरप्रिंट लेना, रिमोट कंट्रोल का काम करना।

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